राजस्थान में रबी सीजन की बुवाई शुरू होते ही किसान भाइयों के सामने सबसे बड़ी चिंता नकली बीज और मिलावटी खाद की होती है। अक्सर देखने में आता है कि महंगी कीमत चुकाने के बाद भी खाद अमानक निकलती है या बीज का अंकुरण सही नहीं होता। इस गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए राजस्थान सरकार के कृषि विभाग ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है।
प्रदेश में अब बीज, रासायनिक उर्वरक (खाद) और कीटनाशकों के सैंपलों की जांच पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और फेसलेस होगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत शुक्रवार, 23 अक्टूबर को जयपुर के पंत कृषि भवन में कृषि विभाग, राजस्थान सरकार एवं भारतीय डाक विभाग (राजस्थान परिमण्डल) के मध्य 3 वर्षों के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस नई व्यवस्था में AgriQMS (एग्रीकल्चर क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम) डिजिटल प्रणाली लागू की गई है, जिससे अब कोई भी निरीक्षक अपनी मर्जी से लैब नहीं चुन सकेगा।
AgriQMS डिजिटल व्यवस्था क्या है और यह कैसे काम करेगी?
पहले जब खाद या बीज के नमूने लिए जाते थे, तो पूरी प्रक्रिया कागजी होती थी। इसमें मानवीय दखल की गुंजाइश रहती थी और कई बार सैंपल अपनी पसंद की प्रयोगशाला में भेजने के आरोप लगते थे। नई AgriQMS प्रणाली के आने से यह पूरी प्रक्रिया बदल गई है:
- मौके पर ही डिजिटल सैंपलिंग: कृषि आदान निरीक्षक जब किसी दुकान या गोदाम पर सैंपल लेने जाएंगे, तो वे AgriQMS मोबाइल ऐप के जरिए मौके से ही जीपीएस (GPS) लोकेशन, उत्पाद की लाइव तस्वीरें और संबंधित बिल-दस्तावेज अपलोड करेंगे।
- टैम्पर-प्रूफ बारकोड पैकिंग: लिए गए सैंपल को विशेष सीलबंद पैकेट में पैक किया जाएगा जिसमें छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं होगी। पैकेट पर सिस्टम से तैयार क्यूआर (QR) कोड और बारकोड चस्पा होगा।
- कंप्यूटर तय करेगा लैब: किस जिले का सैंपल किस टेस्टिंग लैब में जाएगा, यह कोई अधिकारी या निरीक्षक तय नहीं करेगा। AgriQMS सॉफ्टवेयर रैंडम तरीके से खुद प्रयोगशाला का चयन करेगा।
- दोहरी गोपनीयता (डबल ब्लाइंड सिस्टम): जांच करने वाली लैब को यह नहीं पता होगा कि यह सैंपल किस दुकानदार या कंपनी का है। वहीं, सैंपल लेने वाले इंस्पेक्टर को यह खबर नहीं होगी कि उसका सैंपल किस लैब में जांच के लिए गया है।
- डाक विभाग द्वारा सुरक्षित परिवहन: सभी नमूनों को जयपुर स्थित नोडल केंद्र भेजा जाएगा जहां उनकी पहचान को पूरी तरह मास्क (गोपनीय) किया जाएगा। इसके बाद भारतीय डाक विभाग स्पीड पोस्ट और बिजनेस पोस्ट के जरिए सीधे संबंधित प्रयोगशाला तक पहुंचाएगा, जिसकी रियल-टाइम ऑनलाइन ट्रैकिंग होगी।
राजस्थान में बीज व खाद जांच की नई बनाम पुरानी व्यवस्था
| व्यवस्था | पुरानी कागजी व्यवस्था | नई AgriQMS डिजिटल व्यवस्था |
|---|---|---|
| सैंपल संग्रहण | साधारण कागजी पर्ची व सामान्य थैली | AgriQMS ऐप, GPS टैगिंग और लाइव फोटो |
| प्रयोगशाला का चयन | निरीक्षक या स्थानीय स्तर पर तय | सॉफ्टवेयर द्वारा स्वतः रैंडम आवंटन |
| नमूने की पहचान | दुकानदार व कंपनी का नाम खुला रहता था | बारकोड कोडिंग व पूर्ण पहचान मास्किंग |
| सैंपल परिवहन | हाथ से या साधारण डाक से भेजा जाता था | डाक विभाग की स्पीड पोस्ट व ऑनलाइन ट्रैकिंग |
| जांच रिपोर्ट | कागजी डाक से आने में हफ्तों लगते थे | डिजिटल हस्ताक्षरित रिपोर्ट सीधे पोर्टल पर |
किसानों और ईमानदार व्यापारियों को क्या लाभ मिलेगा?
इस फैसले का सीधा फायदा प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं को मिलेगा:
- फसल खराबे से बचाव: गेहूं, सरसों और चने की बुवाई के समय यदि बीज में मिलावट हो या डीएपी खाद में फास्फोरस की मात्रा कम हो, तो किसान की पूरी लागत डूब जाती है। पारदर्शी जांच से अमानक सामान बाजार से तुरंत बाहर होगा।
- उत्पादन और आमदनी में सुधार: जब खेत में शुद्ध और प्रमाणित बीज लगेगा और पूरी ताकत वाली खाद मिलेगी, तो प्रति हेक्टेयर पैदावार में स्वाभाविक इजाफा होगा।
- ईमानदार दुकानदारों का संरक्षण: जो खाद-बीज विक्रेता ईमानदारी से पक्का बिल देकर गुणवत्तापूर्ण सामान बेचते हैं, उन्हें बिचौलियों और अनुचित दबाव से मुक्ति मिलेगी।
- सख्त कानूनी कार्रवाई: डिजिटल रिकॉर्ड होने की वजह से किसी भी मिलावटखोर या फर्जी कंपनी के खिलाफ कानूनी साक्ष्य मजबूत रहेगा और तत्काल लाइसेंस निलंबन या एफआईआर दर्ज हो सकेगी।
डाक विभाग के साथ 3 साल का अनुबंध और BNPL सुविधा
23 अक्टूबर को जयपुर के पंत कृषि भवन में कृषि विभाग और भारतीय डाक विभाग के मध्य यह समझौता 3 साल की अवधि के लिए हुआ है। डाक विभाग कृषि विभाग को ‘Book Now Pay Later’ (BNPL) सुविधा देगा। यानी सैंपलों को बिना किसी अग्रिम भुगतान के तुरंत रवाना किया जाएगा और विभाग इसका भुगतान बाद में बिल के आधार पर करेगा। इससे परिवहन में किसी भी तरह की देरी नहीं होगी और रबी सीजन के दौरान सभी सैंपलों की रिपोर्ट तय समयसीमा में आ सकेगी।
अमानक खाद या घटिया बीज मिलने पर किसान कहाँ शिकायत करें?
यदि किसी किसान भाई को बाजार से खरीदे गए बीज, खाद या कीटनाशक की गुणवत्ता पर संदेह है, तो वे सीधे कृषि विभाग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
- पक्का बिल जरूर लें: खाद, बीज या कीटनाशक खरीदते समय डीलर से अपनी फसल, किस्म, लॉट नंबर और एक्सपायरी डेट दर्ज पक्का बिल अवश्य लें।
- कॉल सेंटर हेल्पलाइन: किसान साथी हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
- आधिकारिक वेब पोर्टल: अधिक जानकारी और विभागीय योजनाओं के लिए राजस्थान कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल agriculture.rajasthan.gov.in तथा राज किसान साथी पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
- स्थानीय कृषि अधिकारी: अपने क्षेत्र के सहायक कृषि अधिकारी (AAO) या कृषि पर्यवेक्षक के पास पक्के बिल की प्रति के साथ लिखित शिकायत दी जा सकती है।
संक्षेप में किसान भाइयों के लिए काम की बात:
राजस्थान में अब खाद-बीज के नमूनों की जांच कंप्यूटर जनरेटेड बारकोड और रैंडम सॉफ्टवेयर से होगी। डाक विभाग के जरिए सुरक्षित स्पीड पोस्ट से सैंपल लैब पहुंचेंगे। इस व्यवस्था से रबी फसलों में नकली खाद-बीज का खतरा समाप्त होगा और सही इनपुट से पैदावार बढ़ेगी।