रबी फसलों की बुवाई सिर पर है और इस समय खेतों की जुताई के साथ सबसे बड़ा खर्च बीज खरीदने का ही आता है। खासकर तुअर, उड़द, मसूर और चना जैसी दलहनी फसलों का प्रमाणित बीज बाजार में इतना महंगा मिलता है कि कई किसान भाई मजबूरी में घर का पुराना बीज ही बो देते हैं। लेकिन इस बार ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय दलहन मिशन के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। अब अगर आप नई किस्मों का प्रमाणित बीज लेते हैं, तो तुअर, उड़द और मसूर पर सरकार पूरी 100% सब्सिडी दे रही है—यानी प्रति क्विंटल ₹12,000 तक की सीधी बचत। वहीं अगर आप चने की बुवाई करने जा रहे हैं, तो चने के बीज पर भी 75% तक की छूट तय की गई है।
आइए सीधे और सरल शब्दों में समझते हैं कि किस फसल पर आपको कितना फायदा मिलेगा और अपनी नजदीकी सोसायटी या कृषि विभाग से यह बीज कैसे उठाना है।
किस फसल के बीज पर कितनी सब्सिडी मिलेगी?
सरकार के नए नियमों के मुताबिक, सब्सिडी इस बात पर तय होगी कि बीज की किस्म कितनी नई है और फसल कौन-सी है:
| दलहन फसल | किस्म की स्थिति | कितनी सब्सिडी मिलेगी? | अधिकतम फायदा (प्रति क्विंटल) |
|---|---|---|---|
| तुअर (अरहर), उड़द, मसूर | 5 साल से कम पुरानी नई किस्में | 100% (पूरी छूट) | ₹12,000 तक |
| तुअर, उड़द, मसूर | 5 से 10 साल पुरानी किस्में | 75% | ₹9,000 तक |
| चना व अन्य दलहन फसलें | 5 साल से कम पुरानी नई किस्में | 75% | ₹6,000 तक |
| चना व अन्य दलहन फसलें | 5 से 10 साल पुरानी किस्में | 50% | ₹4,000 तक |
घर के पुराने बीज के बजाय प्रमाणित बीज क्यों बोना चाहिए?
अक्सर हम सोचते हैं कि घर पर रखा पुराना चना या मसूर ही बो देते हैं, बाजार में पैसे बच जाएंगे। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि घर के पुराने बीज में उकठा, जड़ गलन और फफूंद लगने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। कई बार आधा बीज खेत में उग ही नहीं पाता।
वहीं सरकारी प्रमाणित बीज वैज्ञानिक लैब में उपचारित और जांचा-परखा होता है:
- 85 से 90% तक जमाव: खेत में पौधे पूरे उगते हैं, जिससे खाली जगह नहीं छूटती।
- बीमारियों से बचाव: शुरूआती फफूंद और मिट्टी जनित बीमारियों से फसल सुरक्षित रहती है।
- 20 से 25% अधिक पैदावार: नई किस्मों का दाना बोल्ड और चमकदार होता है, जिससे औसतन 2 से 3 क्विंटल प्रति एकड़ उपज बढ़ जाती है।
- मंडी में बढ़िया दाम: साफ और बोल्ड दाना होने के कारण व्यापारी भी बोली में अच्छा भाव देते हैं।
खेत की डिजिटल मैपिंग पर ₹30 प्रति हेक्टेयर अलग से मदद
इस योजना में खेतों की सही नाप-जोख और रकबे के ऑनलाइन सत्यापन के लिए सैटेलाइट मैपिंग तकनीक जोड़ी गई है। जो किसान अपने रकबे की सही मैपिंग कराएंगे, उन्हें प्रति हेक्टेयर ₹30 की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी ताकि सही किसान तक पूरा लाभ पहुंचे।
सब्सिडी वाला बीज कहां से और कैसे मिलेगा?
रबी बुवाई के लिए आप इन तीन तरीकों से बीज ले सकते हैं:
- गांव की सेवा सहकारी समिति (सोसायटी): सबसे आसान तरीका यही है। अपने गांव की नजदीकी पैक्स या लैम्पस सोसायटी पर जाएं। वहां अपनी जमीन की पावती दिखाकर बीज उठाएं। ज्यादातर सोसायटियों में सब्सिडी का पैसा काटकर सीधे बहुत ही कम रेट पर बीज की बोरी हाथ में दे दी जाती है।
- राज्य बीज निगम के काउंटर: तहसील या जिला स्तर पर बने बीज विकास निगम के सरकारी गोदामों से भी सीधे रसीद कटवाकर बीज लिया जा सकता है।
- कृषि विभाग के सरकारी पोर्टल: अगर आपके राज्य में ऑनलाइन व्यवस्था लागू है, तो सीधे सरकारी पोर्टल से पर्ची ले सकते हैं:
- मध्य प्रदेश के किसान: ई-कृषि अनुदान पोर्टल (dbt.mpdage.org)
- राजस्थान के किसान: राजकिसान साथी पोर्टल
- उत्तर प्रदेश के किसान: पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल (upagriculture.com)
साथ में कौन-से कागजात लेकर जाने हैं?
- आधार कार्ड
- जमीन की खसरा/खतौनी की नकल (B1 या पावती)
- बैंक पासबुक की फोटोकॉपी
- आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर
किसान भाइयों के जरूरी सवाल-जवाब
सवाल 1: क्या चने के बीज पर भी पूरी 100% छूट मिलेगी?
जवाब: नहीं। 100% छूट केवल तुअर, मसूर और उड़द की नई किस्मों पर रखी गई है। चने की नई किस्मों पर 75% की छूट है (अधिकतम ₹6,000 प्रति क्विंटल तक)। बाकी 5 से 10 साल पुरानी किस्मों पर 50% छूट मिलेगी।
सवाल 2: क्या पूरा पैसा पहले देना होगा और बाद में खाते में आएगा?
जवाब: अधिकतर राज्यों में सोसायटियों से बीज लेते वक्त किसान को पूरी रकम नहीं देनी पड़ती। जितनी सब्सिडी सरकार दे रही है, वह पैसा काटकर सिर्फ बचा हुआ छोटा-सा हिस्सा ही जमा करना होता है।
सवाल 3: सोसायटियों में बीज कब तक मिलेगा?
जवाब: रबी बुवाई का समय आ चुका है और सोसायटियों में स्टॉक पहुंचना शुरू हो गया है। आप बुवाई से पहले ही अपनी समिति प्रबंधक या कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर लें ताकि मनपसंद किस्म का बीज समय पर मिल सके।